Monday, February 05, 2007

लाईफ्



फुलों से हॅसते खिलखिलाते हो तुम,
कोयल से गुनगुनाते हो तुम,
दोस्तों की दोस्त,
'लाईफ' कहलाते हो तुम |

अरे ओ मेरे दोस्त 'लाईफ'(तोम्बिसना)
तुम कभी न बदलना,
सदा यूँ ही गुनगुनाते,
हॅसते और मुस्कुराते रहना ||

अमित कुमार सिंह

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